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समीक्षकः
डॉन स्टीवंस
मैकगुइनेस प्रेरणादायक
ऐसा शब्द है,
जिसका हम इतना
प्रयोग करते
हैं कि इसने
अपना अधिकांश
अर्थ खो दिया
है। यह बात मुझे
अब स्पष्ट हुई
है, जब मैं ऐसा
शब्द ढूँढ़ने
की कोशिश कर
रहा हूँ, जो, फ़ॉर लव
ऑफ़ लाइफ़ (जीवन के
प्रति प्यार
के लिए), पुस्तक
और इसकी लेखिका
का पूर्ण रूप
से वर्णन कर
सके। मुझे
लौरा से इस साल
के शुरू में
सीएफ़ परिवार
के अध्यापन
दिवस के अवसर
पर न्यूयार्क
में अल्बेनी
में मिलने का
सौभाग्य प्राप्त
हुआ था। वह मुख्य
वक्ता थी। मैं
तुरंत समझ गई
कि उसके पास
ऐसा प्रभामंडल
और ऊर्जा है,
जो इतनी गरमजोश
और ऊँचा उठाने
वाली है कि आप
उसके साथ समय
बिताना चाहते
हैं। वह ऐसी
महिला है, जिसे
आप आसपास देखना
चाहते हैं, क्योंकि
वह आपको जीवन
के बारे में
अच्छा महसूस
करवाती है।
आप आशा करते
हैं कि शायद
उसके पास जो
कुछ है, उसका
छोटा-सा अंश
आपको भी स्पर्श
कर सकेगा। ईमानदारी
की बात यह है
कि मैंने लौरा
की किताब उससे
मिलने के बाद
पढ़ी। यह कहना
बहुत कठिन है
कि उससे हुई
मुलाकात ने
उसकी पुस्तक
पर मेरी व्याख्या
को कैसे प्रभावित
किया – मैं
पुस्तक को पसंद
करना चाहता
था, क्योंकि
मैंने उसे बहुत
पसंद किया था,
और उससे बातचीत
ऐसी थी – क्या
मैं प्रेरणादायक
कहने का साहस
करूँ। पर मैं
जानती हूँ कि
मेरी मित्र
लीज़ा ने मुझसे
पहले फ़ॉर लव
ऑफ़ लाइफ़ पढ़ी थी, और वह
मुझे अकसर इस
चामत्कारिक
महिला के बारे
में और यह बताती
रहती थी कि कैसे
उसकी कहानी
ने सीएफ़ होने
के अपरिहार्य
अनुभव प्रति
उसकी आँखें
खोल दीं – केवल भौतिक रूप
से ही नहीं, अपितु
भावनात्मक
रूप से भी। ऐसा लगता
था कि इस पुस्तक
ने लीज़ा को
सचमुच उत्साहित
किया था। और
मैं इसका कारण
जानने के लिए
उत्सुक था। आज सीएफ़ के
साथ जीवन के
बारे में पहले
से कहीं ज़्यादा
किताबें हैं।
एक ओर यह बात
जहाँ शायद अच्छी
है, वहीं यह थकाऊ
भी है। कुछ लेखक
इस अवसर का प्रयोग
भावुकता और
नाटकीयता के
साथ बात को खींचते
रहने में करते
हैं। सच यह है
कि मुझमें ऐसी
किताबों के
लिए धैर्य नहीं
है। उनसे मुझे
ऊब होती है।
फ़ॉर लव
ऑफ़ लाइफ़ ताज़गी लिए
हुए है, क्योंकि
यह ईमानदार
और आशापूर्ण
है, चाशनीमय
और भावुक नहीं
है। लौरा की
किताब में आप
दर्द, संघर्ष,
विश्वास और
प्रेम की कहानी
पाएँगे। यदि आपको सीएफ़
के साथ जीवन
के बारे में
एक ही किताब
पढ़नी है, तो
वह किताब यही
है। हमें लौरा
के गोद लिए जाने
और उस अद्भुत
महिला के बारे
में पता चलता
है, जो उसकी माँ
बनी। लौरा खुद
को ख़ास व्यक्ति
महसूस करते
हुए बड़ी हुई,
क्योंकि वह
जानती थी कि
उसे "गोद लेने
वाली" माँ ने
उसे विशेष रूप
से इसलिए चुना
था, क्योंकि
उसे अपने दिल
में इस बात का
विश्वास था
कि यह ईश्वर
की योजना थी
कि वह नन्हीं
लौरा की माँ
बने। यह आश्चर्यजनक
नहीं है कि बाद
में अपने जीवन
में, उसके भीतर
की माँ ने उसे
सम्मान दिलाया। मुझे फ़ॉर लव ऑफ़ लाइफ़
के बारे में जो
बात पसंद है,
वह यह है कि इसमें
उपदेशात्मकता
या अतिशयता
नहीं है, तथा
एक आध्यात्मिकता
और विश्वास
है, जो बहुत भारी
हुए बिना हमारे
भीतर प्रवेश
करता है। यह
वास्तविक और
परिचित भी हैः
लौरा याद करती
है कि सचेत किशोरी
होना कैसा था,
क्योंकि सीएफ़
के कारण वह जटिल
था। वह कहती
है कि किशोरावस्था
"पहचान का संकट
थी, जो मुझमें
विषाणु की तरह
घूमती थी।"
वह अपने पहले
प्रेम-संबंध
का वर्णन करती
है, कि खुद को
लोगों के करीब
ले जाना कितना
मुश्किल हो
सकता है; और
जब वह ऐसा करती
था, तो इससे कुछ
लोग कैसे डर
कर भाग जाते
थे। लौरा मानव
है और हमारी
ही तरह सीमाओं
को तोड़ती हैः
पहली बार वह
प्रशिक्षण
के लिए सिस्टिक
फ़ायब्ररोसिस
न्यास में मैरीलैंड
में बेथेस्डा
में स्वतंत्र
रूप से है, जिसके
दौरान वह शीघ्र
ही बहुत बीमार
हो जाती है।
न्यास के अध्यक्ष
रॉबर्ट ड्रेसिंग
उसे अपने कार्यालय
में बुलाते
हैं और उसे परामर्श
देते हैं कि
वह अभी स्वतंत्र
रूप से रहने
के लिए तैयार
नहीं है और यदि
वह खुद को संभाल
नहीं लेती, तो
उसे घर लौटना
होगा। ीर-धीरे लौरा
में एक परिवर्तन
आता है, जब रोग-मुक्त
होना उसकी प्राथमिकता
बन जाती है और
सब चीज़ें सकारात्मक
हो जाती हैं।
जिस श्रम के
साथ वह डीएनएज़
के परीक्षण
में भाग लेती
थी, उसने मेरे
हृदय को छू लिया,
हालाँकि बहुत
से लोग इस दवाई
को आज सहज मानते
हैं। यह अध्याय
मुझे न केवल
इस बात की याद
दिलाता है कि
इलाज़ और विकास
के मामले में
हम कितना आगे
आ गए हैं, बल्कि
उन लोगों के
बारे में भी
बताता है, जिन्होंने
आज के मुकाम
पर पहुँचने
के लिए त्याग
और श्रम किया। और हालाँकि
यहाँ उसकी पुस्तक
समाप्त हो जाती
है, लेकिन मैं
जानती हूँ कि
वास्तव में
यहीं से आंतरिक
शक्ति और साहस
की और अधिक अद्भुत
कहानी शुरू
होती है। एक
दिन मैं लौरा
से मिली, उससे
परिचय करवाए
जाने से पहले
मैं उसके पीछे
बैठी थी। मुझे
ईर्ष्या हुईः
कितना महान
जीवन है, जिसने
एक किताब लिखी
और जो उसके प्रसार
के लिए पूरी
दुनिया में,
नए-नए लोगों
से मिलने हुए
घूमा। जब लौरा
का परिचय दिया
जा रहा था, तो
अपने नन्हें
सुंदर सपने
से चकित होकर
मैंने देखा
कि उसकी माँ
खड़ी हुई और
उसे कोहनी से
पकड़कर मंचीय
क्षेत्र की
ओर ले चली। और
जब लौरा ने पोडियम
पर माइक की तलाश
में अपना हाथ
इधर-उधर किया,
तो मैं देखती
रही। अब तक मैं
अपने आप में
डूबी हुई थी
और मैंने इस
बात पर ध्यान
नहीं दिया था
कि वह धूप का
चश्मा पहने
थी। मेरे पति
फुसफुसाए, "किसी
ने मुझे बताया
है कि यह नेत्रहीन
है। इसे मधुमेह
है और इसने अपनी
दृष्टि खो दी
है।" मुझे कुछ
पता नहीं था!
यह उसके द्वारा
किताब लिखने
के बाद हुआ।
मुझे शर्म हुई
कि मैंने उससे
ईर्ष्या की। लेकिन फिर
भी, उसकी नेत्रहीनता
के बावजूद, उसके
संघर्ष के बावजूद,
मैं लौरा से
हमेशा ईर्ष्या
करूँगी। वह
एक आंतरिक उल्लास,
एक शांतिमयता
प्रेषित करती
है, जिसे समझाना
कठिन है। मुझे
इस पर कोई शंका
नहीं है, आज भी
वह ज़्यादातर
लोगों के मुकाबले
अधिक स्पष्टता
से देखती है
और सुंदरता
की ज़्यादा
गहराई से सराहना
करती है। मैं
निष्ठापूर्वक
आशा करती हूँ
कि लौरा अपनी
अंतर्दृष्टि
और कहानी को
भविष्य में
और अधिक बाँटेगी।
ऐसे उज्ज्वल
चमकते सितारे
से और अधिक सीखना
बाकी है। संपादक की टिप्पणीः
पिछले अप्रैल
से किशोर मधुमेह
और नौ सालों
से रद्दीकरण-विरोधी
दवाइयाँ लेने
के कारण लौरा
की किडनियों
ने काम करना
बंद कर दिया
है। शीघ्र ही उसकी
किडनी/पैनक्रिज़
बदली जाएगी
और आशा है कि
वह शिकागो में
शामिल होगी। उसकी
पुस्तक की प्रति
प्राप्त करने
के लिए कृपया
www.Forloveoflife.org पर जाएँ
या लेखिका को
लिखेंः Laura J.
Scott Ferris, ISBN 0-9709325-0-2 |