Author

Lori J. Stark, PhD, ABPP
• Professor of Pediatrics • University of Cincinnati College of Medicine • Director • Division of Behavioral Medicine & Clinical Psychology Cincinnati Children’s Hospital Medical Center

Translator
Roohi Khan

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October 10, 2007

सीएफ़ से पीड़ित बच्चों में पोषण-संबंधित व्यवहारवादी पहलू


लोरी जे. स्टार्क, पीएचडी, एबीपीपी
प्रोफेसर - बाल चिकित्सा
यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी कॉलेज ऑफ मेडीसिन

प्रबंधक
व्यवहारवादी औषधि तथा चिकित्सकीय मनोविज्ञान विभाग
सिनसिनैटी चिलरेन्स हॉस्पिटल मेडिकल सेन्टर

सीएफ़ से पीड़ित बच्चों को यह सलाह दी जाती है कि वह अपने से समान उम्र और लिंग, बिना सीएफ़ वाले व्यक्तियों के मुकाबले, ऊर्जा के परामर्शित आहारीय उपभोग (RDI) का 120 से 150% ग्रहण करें, जिसमें से 40% फैट्स में से आए । ऊर्जा के परामर्शित स्तर तक पहुँचने के अनेक फ़ायदे हैं और वह धीरे-धीरे और अधिक नज़र आने लगे हैं । उच्च-स्तर के ऊर्जा उपभोग से वज़न बढ़ता है और उम्र के परसेन्टाइल के मुकाबले, बेहतर वज़न रहता है । उच्च-स्तर की वज़न स्थिति से फफड़ों की कार्यशीलता बेहतर होती है और उम्र बढ़ती है । सीएफ़ से पीड़ित बच्चों के परिवारों को वज़न बढ़ने की और अनुकूल वज़न और लंबाई हासिल करने की आवश्यकता की भली-भांति जानकारी होती है । पोषण-संबंधित क्षेत्रों में हमारे और दूसरों के द्वारा किए गए अध्ययन यह दिखाते हैं कि इस ज्ञान से, आमतौर पर परिवारों का तनाव बढ़ता है न कि सीएफ़ से पीड़ित बच्चे के पोषण-संबंधित स्थितियों का इच्छित परिणाम हासिल होता है । परिवार अक्सर भोजन के समय को एक युद्धक्षेत्र की तरह वर्णित करते हैं और अपने सीएफ़ से पीड़ित बच्चे की देखभाल के इस पहलू में ख़ुद को नाकाबिल महसूस करते हैं । P1,2P यह स्पष्ट है कि माँ-बाप को पोषण की महत्वता का संदेश मिल रहा है, मगर अपने बच्चे के साथ, इलाज के इस आवश्यक तत्व को हासिल करने के लिए काम करने के कौशल का प्रशिक्षण नहीं । इस लेख में हम व्यवहारवादी हस्तक्षेप “नियंत्रण में रहो” के तत्वों को जाँचना चाहेंगे और यह जाँचना चाहेंगे कि किस प्रकार ये तत्व सीएफ़ से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को आहार का पालन करने में आने वाली रुकावटों को संबोधित करते हैं ।

खाना खाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सीएफ़ से पीड़ित बच्चों के माँ-बाप द्वारा अपनाई जाने वाली मुख्य नीति है बच्चे को खाने की मेज़ पर ज़्यादा देर तक रखना । अपने शोध में हमने पाया है कि सीएफ़ से पीड़ित बच्चे, बिना सीएफ़ से पीड़ित बच्चों के मुकाबले में, रात के भोजन पर 6 मिनट ज़्यादा बिताते हैं, और इस शोध में कई बच्चे रात के भोजन पर 30 से 45 मिनट तक बिताते थे ।

हमने जब यह देखने की कोशिश करी कि रात के भोजन के दौरान क्या होता है, तो यह पाया कि सभी बच्चे भोजन के पहले भाग के मुकाबले दूसरे भाग में कम खाते हैं और खाना खाने के परस्पर-विरोधी व्यवहारों को ज़्यादा दर्शाते हैं, जैसे, खाने से मना करना, खाने के लिए माँ-बाप के आवेदन का अनुपालन न करना और यहाँ तक कि खाने की मेज़ छोड़कर हट जाना । जब हमने माँ-बाप के व्यवहार की तरफ़ देखा, तो पाया कि भोजन के दूसरे भाग के दौरान, जब बच्चों की खाने पर से रुची हट जाती है, माँ-बाप बच्चे को खिलाने की अपनी कोशिशों को, खाना परोसकर, खाना खाने का आदेश देकर, बच्चे को खाना खाने के लिए याद दिलाकर, और यहाँ तक कि बच्चे को ख़ुद खाना खिलाकर, बढ़ा देते हैं ।

यह सीएफ़ से पीड़ित बच्चों के माँ-बाप के लिए सही था और बिना सीएफ़ वाले बच्चों के माँ-बाप के लिए भी । हालांकि सीएफ़ से पीड़ित बच्चे और उनके माँ-बाप ने समान व्यवहार दिखाए, परन्तु जितनी बार बच्चों ने खाने का विरोध किया उसकी पूर्ण संख्या और जितनी बार उनके माँ-बाप ने उन्हें खिलाने की कोशिश की उसकी पूर्ण संख्या से, वे सीएफ़ के बिना वाले बच्चों और उनके माँ-बाप से अलग थे । सीएफ़ से पीड़ित बच्चों और उनके माँ-बाप ने इन व्यवहारों को तकरीबन दुगनी बार दिखाया । इसलिए, बच्चे को खाने की मेज़ पर लंबे समय के लिए रखना कारगर साबित नहीं होता और भोजन को अधिक तनावपूर्ण बनाता है । माँ-बाप जिन तरीकों का इस्तेमाल आमतौर पर करते हैं (फुसलाना, आदेश देना, याद दिलाना, और खिलाना) वह काम नहीं करते । यह तरीके किसी भी माँ-बाप के लिए काम नहीं करते, और आमतौर पर इनका उलटा असर होता है क्योंकि यह नकारात्मक व्यवहारों (जो खाने के परस्पर-विरोधी होते हैं) की तरफ़ ध्यान ज़्यादा खींचते हैं न कि खाने के सकारात्मक व्यवहारों की तरफ़ । बच्चे, माँ-बाप का ध्यान पसंद करते हैं, चाहे वह नकारात्मक ही क्यों न हो ।

अपने बच्चे के साथ अलग तरीके से बर्ताव करें :
• पहली बात, सीएफ़ से पीड़ित बच्चों के साथ काम करने के लिए, माँ-बाप और स्वास्थ्य-देखभाल टीम को यह मानना चाहिए कि सीएफ़ के परामर्शित आहार तक पहुँचना मेहनत का काम है और इसके लिए बच्चे को पेट भर जाने के अपने सामान्य एहसास से कुछ आगे जाना पड़ता है (कम-से-कम शुरू में जबतक उनको खाने के रूप में ज़्यादा ऊर्जा लेने की आदत नहीं पड़ जाती है) । आख़िर, कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि सीएफ़ से पीड़ित बच्चे, अपनी उम्र के सीएफ़ के बिना वाले बच्चों के जितना खाते हैं, बस वह सीएफ़ के लिए परामर्शित आहार के लिए जो अतिरिक्त ज़रूरत होती है, वह नहीं लेते ।
• दूसरी बात, बच्चे के सामने ज़्यादा ऊर्जा के फ़ायदों के बारे में ज़ोर दें ताकि वह परामर्शित आहारीय इलाज पाने में भागीदार बनें । फ़ायदों में वह ऊर्जा शामिल है जिसकी बच्चों को खेलने, भागने, स्पोर्ट्स खेलने, लंबे होने, इत्यादि में ज़रूरत पड़ती है । वज़न बढ़ने को बच्चे आमतौर पर एक फ़ायदे के रूप में नहीं पहचानते हैं, और बल्कि सीएफ़ से पीड़ित कई लड़कियाँ “मोटे होने” के बारे में चिन्ता जताती हैं । इसलिए बच्चों से ज़्यादा ऊर्जा बढ़ाने के बारे में बात करते समय, वज़न का बढ़ना, ध्यान का केंद्र नहीं होना चाहिए ।
• तीसरी बात, हम यह सलाह देते हैं कि भोजन का समय 20 मिनट से ज़्यादा न हो । यह इसलिए कि हर मनुष्य में एक जैविक प्रतिक्रिया होती है जिसमें उनका पेट दिमाग़ से कहता है कि 20 मिनट खाने के बाद वह भर गया है । इसलिए 20 मिनट के बाद बहुत कम खाना होने की संभावना है ।
• चौथी बात, प्रशंसा और सराहना करके खाने के व्यवहार और खाने का समर्थन करने वाले व्यवहारों पर ध्यान देकर (जैसे, चम्मच या काँटे में खाना लेना, एक निवाले के बाद दूसरा निवाला लेते रहना, जल्दी चबाना, अलग-अलग खानों का स्वाद लेना, खाना ख़त्म करना), पहले 20 मिनट में बच्चों की मदद करें कि वह जितनी हो सके उतनी ऊर्जा प्राप्त कर सकें । क्योंकि सीएफ़ से पीड़ित बच्चे अपनी उम्र के बच्चों के जितना ही खाते हैं, प्रशंसा और सराहना करने के लिए बहुत मौके होते हैं । अपनी प्रशंसा को उत्साही और विशिष्ट रखें, “केट, मुझे बहुत अच्छा लगा यह देखकर कि तुमने अपने हैमबर्गर के तीन बड़े निवाले लिए !”, “सैम, खाने के उस निवाले को खाते समय चम्मच में खाना लेना स्मार्ट आईडिया है ।”

प्रशंसाएं कई चीज़ें करती हैं :
• वे बच्चों को बिना उनके पीछे पड़े हुए और बिना निर्देश देने की ज़रूरत के वह व्यवहार सिखाते हैं, जिन्हें माँ-बाप पसंद करते हैं । बच्चे बड़ो का ध्यान पसंद करते हैं और बड़ो का ध्यान पाने के लिए वे किसी भी व्यवहार (सकारात्मक या नकारात्मक) को कर सकते हैं । जब माँ-बाप का ध्यान बच्चे के किसी व्यवहार के बाद दिया जाता है, तो वह व्यवहार ज़्यादा घटित होता है । तो खाना खाने के अच्छे व्यवहारों की सराहना करके माँ-बाप उन व्यवहारों पर ध्यान दे रहे हैं और वह व्यवहार बढ़ जाएंगे ।
• प्रशंसाएं, बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाती हैं कि वह इच्छित व्यवहार को कर सकते हैं क्योंकि माँ-बाप इसपर केंद्रित होते हैं कि बच्चा क्या कर रहा/रही है, न कि वह क्या नहीं कर रहा / रही है ।
• अंत में, प्रशंसाएं माँ-बाप और बच्चों के रिश्तों को मज़बूत करती हैं क्योंकि वह सकारात्मक पर केंद्रित होती हैं ।

• पाँचवी बात, जो व्यवहार खाना खाने में बाधा डालते हैं, उनपर ध्यान न दें, जैसे, समय गँवाना, अत्यधिक चबाना, अत्यधिक बोलना, खाने के बारे में शिकायत करना, और यह शिकायत करना कि उसे भूख नहीं है । अगर ध्यान देने से किसी व्यवहार को प्रोत्साहन मिलता है और उसके कारण वह ज़्यादा घटित होता, तो डाँटना, निर्देश देना और फुसलाना भी ध्यान देना होता है और उसके कारण जिन व्यवहारों को माँ-बाप हटाना चाहते हैं, वह ज़्यादा घटित होते हैं । तो अपना ध्यान आप कहाँ देते हैं, इसका चुनाव सोच-समझ कर करें और तब ध्यान न दें, जब बच्चा खाना न खा रहा हो । योजना यह है कि जैसे ही बच्चा खाना खाने की शुरूआत करे या अपना चम्म्च या काँटा उठाए, उसके इस व्यवहार की आप प्रशंसा करें । अगर माँ-बाप हर बात पर ध्यान दें या हर बात को नज़रअंदाज़ करें, तो बच्चा यह नहीं समझ पाएगा / पाईगी कि माँ-बाप को कौन-सा व्यवहार पसंद है और वह हर चीज़ समान गति से करेगा / करेगी ।
• ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इनाम दें, चाहे वह लक्ष्य कोई विशिष्ट कैलोरी मूल्य हो या खाने की कोई विशिष्ट मात्रा । यह करने का सबसे अच्छा तरीका है इक़रारनामा करना । उदाहरण के तौर पर, माँ-बाप और बच्चा विशिष्ट व्यवहारों या ऊर्जा के लक्ष्यों को निर्धारित करें, जिनको हासिल करने के लिए बच्चे को हर भोजन के दौरान और दिनभर के दौरान कोशिश करना चाहिए, और विशिष्ट इनामों को निर्धारित करें, जो इन लक्ष्यों को हासिल करने पर बच्चे को प्राप्त होंगे । इन लक्ष्यों और इनामों को एक इक़रारनामे पर लिखने और बच्चे के साथ ज़्यादा ऊर्जा के फ़ायदों को पहचानने से, माँ-बाप और बच्चे भागीदार बन जाते हैं, जो एक ही लक्ष्य की तरफ़ बढ़ रहे हैं ।
• ये इनाम रिश्वत नहीं होते हैं । ये इनाम एक अच्छा काम करने के नतीजे होते हैं ।
• सामाजिक इनाम, जैसे, एक बच्चे को माँ या बाप के साथ एक ऐसी गतिविधि करते हुए वक्त बिताने का मौक़ा मिलना, जो आमतौर पर उन्हें नियमित रूप से साथ-साथ करने का मौक़ा नहीं मिलता, जैसे, कोई बोर्ड गेम या ताश का खेल खेलना, या माँ या बाप के साथ बास्केटबॉल खेलना । हमने पाया है कि यह गतिविधियाँ बच्चों के साथ बहुत लोकप्रिय हैं ।
• विडियो या कम्पयूटर गेम्स, जिन्हें बच्चे करना पसंद करते है, जैसी गतिविधियाँ भी अच्छा इनाम होती हैं । पसंदीदा गतिविधियों को इनाम की तरह इस्तेमाल करने से बच्चे यह सीख सकते हैं कि अपनी देखभाल करने से और अपने इलाज के लक्ष्यों को हासिल करने से अच्छी चीज़ें होती हैं । यह इलाज के काम करने के आम तरीके के विपरीत है, जिसमें इलाज आमतौर पर पसंदीदा गतिविधियों से दूर करती है । यह कहकर कि “अगर तुमने अपना चिकन और आलू खा लिया और अपना दूध पी लिया, तो तुम आज रात 15 मिनट के लिए विडियोगेम्स खेल सकते / सकती हो”, हम बच्चों को यह सिखाते हैं कि ऊर्जा हासिल करने से सकारात्मक चीज़ें मिलती हैं ।

खाने के बारे में अलग नज़रिया रखें

जिन माँ-बाप ने हमारे इन्टरवेन्शन अध्ययन में भाग लिया है उन्होंने छोटी-छोटी कहानियों के ज़रिए हमें बताया है कि उनके बच्चे का “एक और निवाला” लेना, उनके अगला निवाला न लेने से हमेशा ही बेहतर है, और यह कि वह हमेशा अपने सीएफ़ से पीड़ित बच्चे को “और” खाना खाने के लिए लगे रहते हैं । भोजन के दौरान, रुकने की एक अस्पष्ट जगह, माँ-बाप और बच्चे के बीच लड़ाई का माहौल बना देती है, क्योंकि माँ-बाप हमेशा अपने बच्चे को थोड़ा और खाना खाने के लिए लगे रहते हैं । माँ-बाप ने हमें यह बताया है कि यह जानने का एक मात्र तरीका कि उनके बच्चे का भोजन खाना सही में ख़त्म हो गया है, यही है कि बच्चा भोजन को खाने का विरोध करता / करती है, चाहे वो एक ही निवाला क्यों न हो ।

• भोजन के समय की लड़ाई को कम करने का एक व्यवहार-संबंधी तरीका यह है कि ऊर्जा के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएं । यह इस प्रकार से किया जा सकता है 1) खाने को वज़न करके और माप कर, कैलोरीज़ का हिसाब करके या 2) बच्चे को खाने के उतने बड़े हिस्से देकर, जो आप जानते हैं कि वह खा लेगा / लेगी, और भोजन शुरू करने से पहले यह निर्धारित करके कि बच्चे को उल्लेखित इनाम पाने के लिए कितना खाना होगा ।
o हर भोजन और हर दिन के लिए ऊर्जा के एक लक्ष्य को निर्धारित करने से माँ-बाप को रुकने का एक स्थान मिल जाता है । यह माँ-बाप को फ़ौरन प्रतिक्रिया भी देता है कि उनके बच्चे ने अच्छा-ख़ासा खा लिया है और इसके साथ-साथ दोनों माँ-बाप और बच्चों को भोजन के अंत में अनिश्चितता और असफलता के बजाय कुछ हासिल कर लेने का एहसास देता है ।
• अगर किसी बच्चे को सीएफ़ के परामर्शित आहार तक पहुँचने के लिए ज़्यादा खाने की ज़रूरत है, तो उनकी ऊर्जा के उपभोग को धीरे-धीरे, एक-एक समय के भोजन को लेते हुए, बढ़ाएँ । ऊर्जा के लक्ष्यों को एक-एक समय के भोजन को लेते हुए बढ़ाने से बच्चों को बिना अभीभूत हुए, बढ़े हुए ऊर्जा के उपभोग की आदत डालने में मदद मिलती है । इससे माँ-बाप को भोजन में बदलाव करने में मदद मिलती है, ताकि वे उन उच्च-ऊर्जा वाले खानों को शामिल कर सकें, जिनकी सीएफ़ से पीड़ित बच्चों को ज़रूरत होती है । एक समय के भोजन में ऊर्जा को बढ़ाने पर 1 या 2 हफ़्तों तक काम करें और तभी दूसरे समय के भोजन पर जाएं । हर भोजन पर कुछ समय के दौरान केवल 150 कैलोरीज़ बढ़ाना ही, परामर्शित आहार तक पहुँचने में बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है ।
• ऊर्जा का उपभोग बढ़ाते समय, खाना खाने के एक ऐसे अवसर से शुरूआत करना, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, एक अच्छा विकल्प है, जहाँ माँ-बाप ऐसे खाने को परोस सकते हैं, जिनमें बहुत कम तैयारी की ज़रूरत होती है : स्नैक । दिन में 2 या 3 स्नैक्स परोसें और इन खानों को उच्च-ऊर्जा वाला रखें । सीएफ़ से पीड़ित बच्चों को स्वस्थ रहने के लिए जिस अतिरिक्त फैट की ज़रूरत पड़ती है, उसके लिए स्नैक्स एक बढ़िया अवसर है । एक कैन्डी बार या चिप्स को परोसने का, स्नैक एक बहुत अच्छा समय है । क्योंकि दिन के दौरान स्नैक्स लेने के कई अवसर उपलब्ध होते हैं, स्नैक्स से आने वाली कुल ऊर्जा को, भोजन से आने वाली उर्जा की तुलना में ज़्यादा बढ़ाया जा सकता है ।
• परिवारों की बातें यह भी दिखाती हैं कि सीएफ़ की परामर्शित आहार तक पहुँचने के लिए एक अन्य तरीका यह है कि खाने के बड़े हिस्से, या ज़्यादा खाने को परोसा जाए, इस उम्मीद में कि उनका बच्चा थोड़ा और खाना खाएगा / खाएगी । थोड़ा और ज़्यादा खाना परोसने के बजाय, ऐसा खाना परोसें, जिनकी थोड़ी-सी मात्रा में भी ऊर्जा की उच्च-सघनता हो । ऊर्जा की सघनता को बढ़ाने के लिए, मक्खन या मलाई जैसे फैट को मिला दें । हमेशा व्होल दूध परोसें और स्ट्रौबेरी या चॉकलेट जैसे स्वाद मिलाएं । सीएफ़ से पीड़ित बच्चों के माँ-बाप अक्सर यह कहते हैं कि कम फैट वाले खाने पर राष्ट्रीय ज़ोर की वजह से वह किस तरह के खाने को परोसे, उसके बारे में उन्हें परस्पर-विरोधी सलाह मिलती है । यह ज़रूरी है कि उन्हें अपनी सीएफ़ टीम से ज़्यादा फैट वाले खाने परोसने के बारे में समर्थन मिलता रहे और यह आश्वासन मिलता रहे कि सीएफ़ से पीड़ित बच्चों के लिए फैट स्वस्थ है । पेट भर जाने के बाद किसी बच्चे को खाने के लिए मजबूर करना मुश्किल है, इसलिए हम यह नहीं चाहते है कि उनका पेट कम ऊर्जा वाले खाने से भरें और हमें खाने की मात्रा बढ़ानी पड़े । ऊपर चर्चित किए गए व्यवहारवादी तरीकों का इस्तेमाल करके, कम मात्रा में ऊर्जा-सघन भोजन को खाने के लिए प्रोत्साहित करना ही ज़्यादा आसान है ।

सारांश में, सीएफ़ की परामर्शित आहार को हासिल करने के लिए व्यवहारवादी नज़रिये में शामिल है :

1. ऊर्जा के लक्ष्यों को निर्धारित करें, जो एक से दो हफ़्ते की अवधि के दौरान, एक समय के भोजन में बच्चे के ऊर्जा के आम उपभोग को बढ़ाते हैं । दूसरे समय के भोजन के लिए बच्चे के ऊर्जा लक्ष्यों को उसके आम उपभोग स्तर पर रखें । यह ध्यान रखें कि पहले, स्नैक्स कैलोरीज़ पर काम करना सबसे आसान है क्योंकि बच्चे ज़्यादातर उच्चतम ऊर्जा वाले खाने या हर रोज़ 2 से 3 स्नैक्स नहीं खा रहे होते हैं । 2. बच्चे को लक्ष्य निर्धारण में शामिल करें और एक इक़रारनामा बनाए जो ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने पर मिलने वाले, उन इनामों को स्पष्ट करता है, जो सहमति से निर्धारित किए गए हों । ऊर्जा के लक्ष्यों की चर्चा करते समय उन गतिविधियों पर ज़ोर दें जिनके लिए बच्चे को ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती है, जैसे, खेलना, स्पोर्ट्स, आदि ।
3. बच्चे को ऊर्जा के लक्ष्यों तक पहुँचने में मदद करने वाले व्यवहारों को सिखाने के लिए, खाने से संबंधित और खाने के अनुकूल व्यवहारों की प्रशंसा का इस्तेमाल करें । बच्चे के पीछे पड़ना, उसे फुसलाना या उन व्यवहारों पर ध्यान देने से बचें, जो खाना खाने में बाधा डालता हैं, जैसे, समय गँवाना, बहुत लंबे समय के लिए बातें करना या परोसे जाने वाले खाने के बारे में शिकायत करना ।
4. हमेशा सबसे कम मात्रा में उच्चतम ऊर्जा वाले खाने को परोसें, ताकि बच्चा अपने ऊर्जा के लक्ष्यों तक पहुँच पाए ।
5. अगर बच्चा उस भोजन के लिए अपने ऊर्जा के लक्ष्यों तक पहुँचता / पहुँचती है, तो उसकी सराहना करें और जिस इनाम के बारे में आपने सहमति से फ़ैसला किया था, बच्चे को वह दें । अगर बच्चा उस तक नहीं पहुँच पाता / पाती है, तो सिर्फ़ यह कहें कि वह अगले भोजन के परोसे जाने पर उस इनाम को पाने की कोशिश कर सकता / सकती है और अपनी आम गतिविधियों को जारी रखें ।

1. Crist, W., P. McDonnell, et al. (1994). खाने के समय के व्यवहार और सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस से पीड़ित छोटे बच्चे । Journal of Developmental and Behavioral Pediatrics 15: 157-161.

2. Stark, L. J., A. M. Bowen, et al. (1990). सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस से पीड़ित बच्चों में कैलोरीज़ के उपभोग को बढ़ाने के लिए एक व्यवहारवादी नज़रिया । Journal of Pediatric Psychology 15: 309-326.
 
 

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