Authors
Christine Noke
• Executive Director • Cystic Fibrosis Worldwide



Sushil Kumar Kabra, MD

Translator
Sanjeev Kumari Paul

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July 15, 2006

भारत में सिस्टिक फाइब्रोसिस/पुटीय तन्तुमयता


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क्रिस्टीन नोक व सुद्याील कुमार काबरा, एमडी द्वारा

कई चिकित्सा व्यवसायी सिस्टिक फाइब्रोसिस को केवल प्रार्य जनता को प्रभावित करने वाला रोग मानते हैं१ वैसे तो एक दद्याक पहले तक इसे भारतीय उपमहाद्वीप में अत्याधिक दुर्लभ माना जाता था१ फिर भी प्रचलित सूचनाएं यह बताती हैं कि भारतीय बच्चों में निःसंदेह सीएफ है; परन्तु भारत में अभी तक सीएफ का गलत निदान व प्रतिनिधत्व हो रहा है१

अध्ययन के अभाव में, भारतीय जनता में सीएफ का यथार्थ भार अज्ञात है१ यूके तथा यूएस में प्रवासी जनता में अनुमानित प्रबलता १०,००० में १ से लेकर ४०,००० में १ तक मिलती है१ कोई भी ऐसा विद्यााल समुदाय आधारित अध्ययन नहीं है जो प्रत्यक्ष तौर पर भारत में रोग भार का बोध करवाता हो, और इन विवेचनात्मक आंकडों के अभाव में सीएफ, नीतियां बनाने वालों का उचित ध्यान आकर्द्रिात नहीं कर पाती१ यदि भारत में सीएफ की प्रबलता १०,००० जन्म में १ भी हो, तब भी भारत में ३,००० बच्चे सिस्टिक फाइब्रोसिस सहित पैदा होते होंगे१ अतः भारत में विद्यव की सीएफ रोगियों की सबसे बडी जनसंखया होनी चाहिये१

भारत में सीएफ सेवाओं की वर्तमान स्थिति

यूरोप, यूएसए व दक्षिण अमरीका के बहुत से देद्याों में सीएफ सेवाएं भली भांति विकसित हैं और सीएफ रोगियों की उतरजीविता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है१

फिर भी, १९९९ तक भारत में कोई सीएफ सेवायें नहीं थीं१ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली ने आजकल सीएफडब्लयू के नाम से प्रचलित अंतराद्रट्रीय सिस्टिक फाइब्रोसिस (म्यूकोविसिडोसिस) संघ के आर्थिक प्रायोजन से सीएफ सेवाओं को आरम्भ किया१

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Dr. Kabra speaks at ECFS conference

तब से, स्नातकोतर आयुर्विज्ञान द्यिाक्षा व अनुसन्धान संस्थान, चण्डीगड, क्रिद्यिचयन मैडिकल महाविद्यालय, वैलौर व हिन्दूजा अस्पताल, मुम्बई में केन्द्र स्थापित किये गये हैं१ ये केन्द्र सीएफ रोगियों को निदान सेवाएं तथा क्लीनिकल देखभाल प्रदान करते हैं१

CF knowledge is limited in India because CF care is not included in medical curriculum. As a result, diagnostic services have not been established throughout the country and a majority of medical graduates may not have even a single confirmed CF case.

वर्तमान में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में, चिकित्सकों का एक समूह सीएफ रोगियों की देखभाल में सुधार हेतु व भारतीय सीएफ रोगियों की आनुवांद्यिाक रुपरेखा जानने पर अनुसंधान कर रहा है१ इसके अतिरिक्त एम्स में आजकल २०० से अधिक निदानित रोगियों का इलाज चल रहा है१

भारत में सीएफ ज्ञान सीमित है क्योंकि चिकित्सा पाठयक्रम में सीएफ देखभाल द्याामिल नहीं है१ परिणाम यह कि देद्या भर में निदान सेवाएं स्थापित नहीं हैं और हो सकता है, अधिकतर स्नातकों ने एक भी सीएफ प्रकरण की पुद्रिट न की हो१

भारत में सभी सीएफ रोगियों की पहचान करने तथा उन्हें उचित देखभाल प्रदान करने के लिए चिकित्सकों व समाज के बीच इस रोग के बारे में जागरूकता फैलाने की आवद्ययकता है१ ज्ञान वृद्धि से भारत के विभिन्न भागों में निदान तथा क्लीनिकल देखभाल सेवाओं की स्थापना में सहायता प्राप्त होगी१ द्याीध्र निदान व उचित ईलाज इन रोगियों के जीवन की अवधि और गुणवता में सुधार की चाबी है१

भारत में सीएफडब्लयू क्यों है?

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अधिकतर विकसित देद्याों में इन रोगियों के प्रबन्धन में सहायता हेतु सीएफ संघ स्थापित हैं१ भारत में सीएफ ग्रसित सभी रोगियों तक पहुंच बनाने वाले सीएफ संघ के विकास पर फोकस करना सीएफडब्लयू के लिए एक दीर्घकालिक परिणाम होगा१ सीएफडब्लयू के मुखय उद्‌देद्ययों में, भारत में सीएफ बारे जागरूकता फैलाना, उन कार्यकलापों में सहयोग करना जो सीएफ परिवारों को देखभाल प्रदाने करें, तथा एक भारतीय सीएफ प्रतिद्रठान के विकास में तेज़ी, द्याामिल होंगे१

सीएफडब्लयू भारत में भागीदारों के साथ भारतीय सीएफ प्रतिद्रठान के प्रबन्धन, आर्थिक तथा पक्षसमर्थन गुणों में वृद्धि हेतु कार्य करेगी तथा उन स्थानीय नैटवर्कों के साथ सम्बन्ध विकास तथा सहयोग करेगी जिनका लक्ष्य वंद्याानुगत चिरकालिक रोग है१ सीएफडब्लयू भारत और अंतर्राद्रट्रीय समुदाय भर में उन स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सार्वजनिक क्षेत्रों के साथ सम्बन्धों में विस्तार करेगी१ भारत में ज्ञान फैलाव व सीएफ प्रतिद्रठान विकास के द्याुरुआती पगों के रूप में, सीएफडब्लयू अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विभागीय सदस्यों के साथ भारत में सीएफ के यथार्थ भार की पहचान पर कार्य करेगी१

हम भारत में सीएफ ग्रसित रोगियों तक कैसे पहुंच सकते हैं ?

सीएफ अभी भी भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका तथा बांग्लादेद्या जैसे राद्रट्रों में मान्यता रहित हो सकती है१ फिर भी अगर चिकित्सकों को ऐसा विद्यवास है कि सीएफ उनकी जनता से अनुपस्थित है, जैसा कि हमने भारत में पाया है तो वे इस भेदकर निदान करते हुए ध्यान में नहीं रखेंगे१ सीएफ के बारे में बेहतर जागरूकता तथा निदान परीक्षणों की बढ्‌ती हुई उपलब्धता-पसीना परीक्षण व/या डीएनए परीक्षण- से बार बार और अधिक प्रभावित होने वाले व्यक्तियों की पहचान होगी, और भारत के संदर्भ में ऐसा ही होगा१

अन्तिम दो दद्याकों में, लैटिन अमरीका, मध्य-पूर्व तथा भारतीय उपमहाद्वीप से निकली जनता जो दक्षिणी यूरोप में स्थान्तरित हुई है, में सीएफ निदान में बढ्‌त पाई जा रही है१ जिससे भारत और पाकिस्तान की गृह धरती पर रह गये लोगों की महत्वपूर्ण जनसंखया में सीएफ की उपस्थिति में द्यांका नहीं है१

साथ ही भारत में लोगों की सामाजिक आर्थिक स्थिति में अत्यन्त अंतर वाले लोगों का विस्तृत स्पैक्ट्रम है१ कोई भी परिवार द्यिाद्याु रोग विद्योद्राज्ञ से परामर्द्या ले सकता है पर रोगियों की जांच व ईलाज हेतु अपने साधनों का उपयोग करना होता है१ भारत में यह लोगों की अद्वितीय सामाजिक आर्थिक स्थिति और उनके भौगोलिक कारणों से उपलब्ध विकल्पों तक उनकी पहुंच से मिश्रित होता है१ उदाहरण के लिये डा काबरा, जो एम्स में सीएफ रोगियों का ईलाज करते हैं, ने अपने रोगियों में बाहय रोगी सेवाओं को पुनः संगठित करके बेहतर परिणाम अर्जित किये, ताकि जिन बच्चों का मिलने का समय बुक हुआ है, वे एक निद्यिचत तिथि पर पुनः निरीक्षण हेतु वापिस आएं१ साफ तौर पर सीएफ सुविधाओं के साथ जुडी जागरूकता में वृद्धि भारत भर में तथा पडोसी क्षेत्रों में सीएफ रोगियों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करेगी१

एम्स में निदान के समय औसत आयु ५४ महीने है (३-१५४ महीने)१ एसी द्यांका है कि सीएफ से ग्रसित बहुतों की निदान से पूर्व ही कुपोद्राण व द्यवसन जटिलताओं से मृत्यु हो रही है१ निसंदेहः, चिकित्सा विद्यार्थियों को सीएफ के बारे में जानना आवद्ययक है और चिकित्सकों को यह विद्यवास दिलाना होगा कि भारत में सीएफ विद्यमान है१ इस समूह को उचित ईलाज जिसमें कि विद्योद्रातयः अग्न्याद्याय एन्ज़ाइम परिवर्तन चिकित्सा तथा बहुविभागीय टीम की देखरेख तक पहुंच की आवद्ययकता है१

यह अनिवार्य होगा कि सीएफड्‌ब्लयू वर्तमान सीएफ रोगियों को एम्स द्वारा प्रदान हो रही मूल्यवान सेवाओं को ज़ारी रखने हेतु फंडिग खोज पाए, और साथ ही भारत में सीएफ रोगियों की जीवन अपेक्षा व गुणवता सुधार हेतु लक्षित नये सूत्रपातों में सहयोग करे१

भारत के बारे में तथ्य

विद्यव की प्रचीनतम सभ्यताओं में से एक सिन्धु घाटी की सभ्यता ५,००० वर्द्रा पुरानी है१ उतर दक्षिण से आर्यन्‌ जनजातियों ने १५०० बी सी पूर्व अतिक्रमण किया; प्रारम्भिक द्रविड निवासियों के साथ उनके विलय से द्याास्त्रीय भारतीय संस्कृति रचित हुई१ अरब हमले ८वीं द्याताब्दी में द्याुरु हुए, और बाहरवीं में तुर्क, उसके बाद पंद्रहवीं द्याताब्दी के अंत में यूरोपीय व्यापारी आना द्याुरू हुए१ १९वीं द्याताब्दी तक ब्रिटेन ने वस्तुतः सभी भारतीय ज़्ामीनों पर राजनीतिक नियन्त्रण कर लिया था१ ब्रिटिद्या सेना में भारतीय बलों ने दोनों विद्यवयुद्धों में सजीव भूमिका निभाई१ श्री मोहनदास गान्धी और श्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में ब्रिटिद्या उपनिवेद्यावाद के अहिंसक प्रतिरोध से १९४७ में स्वतंत्रता मिली१ उपमहाद्वीप का धर्मनिर्पेक्ष राद्रट्र भारत तथा छोटे मुस्लिम राद्रट्र पाकिस्तान में विभाजन हुआ१ दोनो देद्याों के मध्य तृतीय युद्ध के परिणाम स्वरूप पूर्वी पाकिस्तान एक अलग राद्रट्र बांग्लादेद्या बना१ आर्थिक निवेद्या व उत्पादन में प्रभावद्यााली लाभ प्राप्ति के वाबजूद, भारत के सामने कद्यमीर पर ज ारी मतभेद, भारी जनसंखया वृद्धि, पर्यावरण पतन, विस्तृत गरीबी व जाति तथा धर्म विरोध जैसी समस्याओं का दबाव है१

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स्थिति

दक्षिण एद्यिाया, अरब सागर तथा बंगाल की खाडी के किनारे पर, बर्मा तथा पाकिस्तान के मध्य

भाद्राा

अंग्रेज़ी को सह प्रतिद्रठा तो प्राप्त है ही, राद्रट्रीय, राजनीतिक व वाणिज्यिक संचार के लिए भी महत्वपूर्ण भाद्राा है; हिन्दी राद्रट्र भाद्राा है तथा ३० प्रतिद्यात लोगों की प्राथमिक ज ुबान है; १४ अन्य द्याासकीय भाद्रााएं हैं: बंगाली, तेलगु, मराठी, तमिल उर्दू, गुजराती, मलयालम, कन्नड, उडिया, पंजाबी, आसामी, कद्यमीरी, सिन्धी और संस्कृत; हिन्दुस्तानी उतर भारत में विस्तृत तौर पर बोली जाने वाली हिन्दी उर्दू का परिवर्तय है पर यह द्याासकीय भाद्राा नहीं है१

 
 

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