Author

Ana Stenzel

Translator
Rajesh Kumar

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July 15, 2006

सांस्कृतिक नज़रिये से सीएफ़ के साथ रहना


जब मैं बचपन में अस्पताल में भरती हुई, तो एक चिकित्सक ने मुझे बताया थाः "तुम्हें संभवतः सीएफ़ नहीं हो सकता, तुम श्वेत नहीं हो!" बाद में बचपन में ही, जब मैंने पहली बार सीएफ़ शिविर में भाग लिया, तो शिविर में आए लोगों के एक समूह ने मुझे जिज्ञासापूर्वक घेर लिया। एक किशोर ने आश्चर्य से कहाः "तुम्हें सीएफ़ है?! मैं सोचता था कि चीनी लोगों को सीएफ़ नहीं हो सकता।" मैंने शीघ्रता से उत्तर दिया कि सभी एशियाई चीनी नहीं होते, और कि मैं दरअसल आधी जापानी और आधी जर्मन हूँ। मैं इस तरह के पलों के साथ संघर्ष करती रही और सोचती रही कि मेरी माँ को ही इस भाग्य के लिए क्यों चुना गया, जो मुझे इस ग्रह पर एकमात्र जापानी व्यक्ति लगती थी, जिसमें सीएफ़ के ज़ीन थे। मेरे दिमाग़ में अकसर यह विचार रहता था कि क्या उनके पूर्वज रूस से उत्तरी जापान में स्थानांतरित हो गए थे, और इस तरह मैं उनका जापानी रक्त कोकेसियाई ज़ीन में मिलाती रही। (मेरी राष्ट्रवादी जापानी दादी सख़्ती से इस बात से इंकार करती है कि उनका परिवार और कुछ नहीं, बल्कि शुद्ध जापानी है!)। या शायद मुझे वास्तव में सीएफ़ बिल्कुल नहीं है, और यह किसी किस्म की निदान संबंधी भूल है।

जन्म से मेरे लक्षण स्पष्ट मेकोनियम इलियुस, अकसर निमोनिया, और जब भी मैं चिकनाई वाला अमेरिकी भोजन करती थी, तो बहुत तेज़ पेट-दर्द हैं। जन्म के समय मेकोनियम इलियुस तो एक सौभाग्य था, जिससे मेरा और मेरी एक जैसी जुड़वाँ बहन, ईज़ाबेल का जल्दी निदान हो सका। निश्चित रूप से, यदि मुझे मेकोनियम इलियुस नहीं होता, तो हमारा सीएफ़ सालों तक बिना पहचान के बना रहता, क्योंकि एशियाई बच्चों में इसके होने का कौन संदेह करता?

मेरे माता-पिता के लिए, जो बस कुछ ही साल पहले अमेरिका में देशांतरित हुए थे, यह निदान एक झटका था, और वे पराए देश में अपनी बीमार जुड़वाँ बेटियों की देखभाल के काम में डूब गए। केवल एक संबंधी को छोड़कर सभी जापान या जर्मनी में रहते थे, इसलिए उनके पास विस्तृत परिवार की वह मदद नहीं थी, जो अनेक परिवारों को सीएफ़ बच्चों की देखभाल के लिए चाहिए होती है। हमारा एक बड़ा भाई भी था जो स्वस्थ था, लेकिन जब हमारा जन्म हुआ तो वह केवल 18 महीनों का था।

आज, स्वास्थ्य देखभाल के पेशे में लगे एक वयस्क के रूप में, मैंने सीख लिया है कि किसी व्यक्ति की संस्कृति बीमारी के उसके बोध और उसकी व्यवस्था प्रणाली पर कितना प्रभाव डालती है। मेरा लालन-पालन सांस्कृतिक प्रभाव में मिला हुआ था। मेरी माँ ने मुझे गामा,न या निश्चय, और शिक्करी, या अनुशासन के जापानी मूल्य सिखाए, जिन्होंने मुझे सीएफ़ जैसी माँग करने वाले रोग से लड़ने में मदद की। उन्होंने मुझे सिखाया कि मुरी, या पीड़ा, जीवन का भाग होता है और यह व्यक्ति को और मज़बूत बनाता है। कम सकारात्मक टिप्पणी के रूप में, शर्मिंदगी, मेंडो (बोझ), और विभिन्नता के प्रति कलंक के जापानी मूल्य भी मेरी चेतना में आ गए। मेरे जर्मन चिकित्सक पिता के रूप में, जिन्होंने अपना बचपन विश्व युद्ध II के दौरान यूरोप में घूमते हुए बिताया था, उन्होंने मुझे सिखाया कि एक अच्छी सैर फेफड़े साफ़ करती है, और व्यक्ति को हमेशा तथ्य की शोध और विश्लेषण करते रहना चाहिए। इसने मुझे व्यायाम का महत्व सिखाया, और सीएफ़ देखभाल के बारे में यथासंभव पूछताछ करना सिखाया। हम जापान और जर्मनी में उनकी बचपन की युद्ध की कहानियाँ सुनते हुए बड़े हुए, और हमने इस बात की सराहना करना सीखा कि सीएफ़ के बावजूद अमेरिका में हमारा जीवन, उतना ख़राब नहीं है। हमें एक साल के लिए जापान में भी रहने का सुअवसर मिला, जहाँ हम जापान विश्वास चिकित्सकों के पास गए और हमने वैकल्पिक औषधियों के बारे में सीखा।

आधी जापानी होना हमेशा आसान नहीं था। चिकित्सा के पेशेवरों ने अकसर हमारे ख़राब स्वास्थ्य का कारण हमारी जातीयता को माना। मेरी दयनीय माँ पर दोष लगाया गया कि हमारा कुपोषण इसलिए था कि उसने हमें कम कैलोरी के चावल और मछली खिलाई, न कि वसा वाले अमेरिकी हैमबर्गर। जब हम पर 19 साल तक होते-होते भी यौवन नहीं आया, तो हमें बताया गया कि चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकिः "तुम्हें हड़ियल ही होना है – तुम जापानी हो!" मेरे डॉक्टर ने एक बार यहाँ तक सोच लिया कि मेरा बढ़ा हुआ आईजीई स्तर और दमे के लक्षण मेरे द्वारा बहुत अधिक सुशी खाने के कारण पैदा हुए कीटाणुओं की एलर्जी-संबंधी प्रतिक्रिया है। वह ग़लत था, निश्चित रूप से। मेरी माँ, जो अंग्रेज़ी द्वितीय भाषा के रूप में बोलती थी और जिसे अमेरिकी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में खुद की रक्षा करना सीखना पडा, इन आरोपों के कारण अकसर अपराधी, अलग-थलग और निराश महसूस करती थी।

मैंने अपनी जुड़वाँ बहन के साथ द्वि-जातीय और बीमार रूप में बढ़ने की चुनौती में साझेदारी की। जैसा कि बहुत से पाठक जानते होंगे, सीएफ़ के साथ बहन-भाई होना आम बात है, क्योंकि यह जनन-संबंधी रोग है। लेकिन सीएफ़ के साथ अपने 34 वें साल तक, मुझे बहुत कम एक जैसे जुड़वाँ मिले हैं। सीएफ़ के साथ जुड़वाँ होना अत्यधिक मददगार था और इसने भावनात्मक रूप से और शारीरिक दोनों रूप से हमारे बचे रहने में योगदान किया। हमने छाती के शारीरिक इलाज में एक दूसरे से की मदद की, हम साथ-साथ अस्पताल में भरती हुए और सहजीवी का संबंध बना लिया। प्रतियोगिता अन्तर्जात थी – हमने अकसर प्रतियोगिता की कि इलाज के दौरान कौन अधिक बलगम निकाल सकता है, या कौन इलाज को अधिक कड़ाई से बर्दाश्त कर सकता है, या कौन अधिक खा सकता है। इस प्रतियोगिता ने हमें अभिप्रेरित और अनुशासित रखा। लेकिन हमारे मस्तिष्क में गहराई में इस बात की चिंता का अंतिम भय था कि कौन पहले मरेगा, और एक दूसरे को जीवित रखने की ज़िम्मेदारी बहुत अधिक थी। जब हमारे एक जैसी चिकित्सा सारणी के बावजूद मेरा स्वास्थ्य अधिक तेज़ी से ख़राब होने लगा, तो अपराध और असहायता के कारण ईज़ाबेल टूट गई। मैं सोचती थी कि मैं अधिक बीमार क्यों हो रही हूँ - मैं क्या ग़लत कर रही हूँ और यह इतना पक्षपातपूर्ण क्यों है?

सौभाग्य से, जून 2000 में मेरा फेफड़ों का दोहरा प्रत्यारोपण हुआ। अनेक सालों तक हम एक दूसरे से दूषण के जोखिम के कारण अलग रहे, क्योंकि प्रत्यारोपण के बाद मुझे इम्युनो-सप्रेस कर दिया गया था और उसे फेफड़ों का सीएफ़ दूषण था। वर्षों की सहजीविता के बाद, अलगाव असहनीय था। तथापि, चार साल के बाद, मेरी बहन को सीएफ़ की आकस्मिक समापन की स्थिति का सामना करना पड़ा। उसके जीवन के एकदम अंतिम समय में, मैंने उसे वायु-यंत्र पर देखा, और जिस भय से मैं जीवन भर पीड़ित रही, वह अंततः स्पष्ट था – पहले वह मरेगी। लेकिन फिर एक चमत्कार हुआ, और मेरी बहन को फेफड़ों के प्रत्यारोपण के लिए केवल दो सप्ताह के लिए सूचीबद्ध होने के बाद, जीवन का उपहार मिला। हमारा परिवार अंत्येष्टि की व्यवस्थाओं पर विचार करता रहा और हमने उसे आईसीयू में बैठकर कहते हुए सुना, "क्या मेरा अभी-अभी प्रत्यारोपण हुआ है?" यह मेरे जीवन की सबसे खुशी का अवसर था।

वर्षों पहले, मेरे जापानी दोस्तों ने हमारे लिए ओरिगेमी काग़ज़ के 1000 सारस बनाए थे, जो ज़ेनबारज़ुरु कहे जाते हैं। जापानी संस्कृति में यह सुंदर कला-कार्य इच्छाएँ पूरी होने और रोग-मुक्त होने की प्रार्थनाओं का प्रतीक है। मैंने आज अपने कमरे में ज़ेनबारज़ुरु को देखा और मुझे जीवित रखने में अपनी संस्कृति की शक्ति को महसूस किया। आज, ईज़ाबेल और मैं दोनों प्रत्यारोपण के बाद खुश और स्वस्थ हैं और सीएफ़ से मुक्त जीवन का आनंद ले रहे हैं। हम सचमुच भाग्यशाली हैं।

सीएफ़ कोकेसियाई लोगों में सर्वाधिक आम है, लेकिन यह एशियाई सहित अन्य जातीय समूहों में भी होता है। मैंने हाल ही में जापान में सीएफ़ वाले अनेक परिवारों के बारे में सुना है, जिन्होंने जापान सीएफ़ नेटवर्क बनाया है। मैंने कुछ साल पहले एक सम्मेलन में भाग लिया था, जिसमें ताइवान से सीएफ़ रोगी शामिल हुए थे। निदान न होने के कारण और पर्याप्त इलाज के अभाव में इन सीएफ़ रोगियों में से अनेक की जल्दी मृत्यु हो जाती है। जनन-संबंधी परामर्शदाता के रूप में, मैं सभी जातियों में सीएफ़ के लक्षणों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का मज़बूती से समर्थन करती हूँ और नवजातों की सीएफ़ स्क्रीनिंग की वकालत करती हूँ, जिससे कि सभी जातियों के शिशुओं का शीघ्रतापूर्वक निदान और इलाज हो सके। हम कैलिफ़ोर्निया में नवजातों की स्क्रीनिंग की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

एनाबेल (एना) स्टेंज़ेल और उनकी बहन, ईज़ाबेल (ईज़ा) अमेरिका में, कैलिफ़ोर्निया में, रेडवुड शहर में रहती हैं। वे 34 वर्ष की हैं। एनाबेल स्टैनफ़ोर्ड चिकित्सा केंद्र पर जनन-संबंधी परामर्शदाता हैं और ईज़ाबेल सामाजिक कार्यकर्ता हैं। दोनों सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस अनुसंधान इंक. के द्वारा सीएफ़ समुदायों के साथ सक्रिय हैं। वे प्रत्यारोपण के बाद अपने नए जीवन का यात्रा, हाइकिंग, साइकिल चलाने, और तैराकी का आनंद ले रही हैं, और परिवार और दोस्तों के साथ मज़ा करती हैं। वे अपने माता-पिता, भाई, और अंग-दाताओं के प्रति आभारी हैं। आप एना को anana1872 @ yahoo.com पर ई-मेल कर सकते हैं।
 
 

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